घड़साना में इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र की सिंचाई जल समस्या पर किसान की मांगें

घड़साना सिंचाई संकट: किसान की मांगें और जल प्रबंधन पर सुबेसिंह यादव का दृष्टिकोण

इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में सिंचाई जल की उपलब्धता, फसल नुकसान और रेग्यूलेशन को लेकर किसान सुबेसिंह यादव ने तीन मांगें रखी हैं। यह लेखक का दृष्टिकोण है।

विशेष टिप्पणी | घड़साना। इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में सिंचाई पानी की उपलब्धता और खरीफ फसलों पर असर को लेकर किसान सुबेसिंह यादव ने चिंता जताई है। यादव ने जल‑प्रबंधन, फसल नुकसान के आकलन और पूरे साल के रेग्यूलेशन को लेकर सरकार व सिंचाई विभाग से तत्काल निर्णय की मांग की है।

लेखक परिचय: उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार सुबेसिंह यादव किसान हैं तथा एम.ए., एल.एल.बी. और सेवानिवृत्त आईएएस हैं। यह लेख उनका दृष्टिकोण है; इसमें व्यक्त निष्कर्ष और आरोप लेखक के हैं।

मांग: उपलब्ध जल का बेहतर नियोजन हो

यादव का कहना है कि मौजूदा जल‑उपलब्धता में बेहतर प्रबंधन, नहरों की छीजत रोकने और पारदर्शी संचालन से सिंचाई चक्र सुधारा जा सकता है। उनका तर्क है कि पानी की कमी के कारण अनूपगढ़, घड़साना और रावला क्षेत्र में फसलों पर दबाव बढ़ रहा है। इन दावों पर जल संसाधन विभाग की इस लेख के प्रकाशन तक कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है।

किसानों की तीन प्रमुख मांगें

  1. उपलब्ध पानी के आधार पर चार समूहों में से दो समूहों को एक साथ सिंचाई जल देने की व्यवस्था की जाए।
  2. पूरे वर्ष का रेग्यूलेशन सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसान अपनी बुवाई और सिंचाई की योजना बना सकें।
  3. बारिश न होने और सिंचाई जल की कमी से खराब हुई खरीफ फसलों का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए।

नहर परियोजना और क्षेत्र की निर्भरता

इंदिरा गांधी नहर परियोजना उत्तर‑पश्चिम राजस्थान के बड़े हिस्से में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था से जुड़ी है। यादव के अनुसार क्षेत्र की खेती नहर जल पर बहुत अधिक निर्भर है और कई जगह भूजल खारा होने के कारण ट्यूबवेल सिंचाई व्यावहारिक विकल्प नहीं है। उन्होंने परियोजना के संचालन और फीडर नहरों के रखरखाव को प्राथमिकता देने की मांग की है।

पुराने आंदोलन का संदर्भ, शांति की अपील

यादव ने 2004 के घड़साना आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं का समय पर संवाद और प्रशासनिक समाधान जरूरी है। उन्होंने चेतावनी के बजाय शांतिपूर्ण, संवैधानिक बातचीत और स्पष्ट जल‑आपूर्ति कार्यक्रम की जरूरत पर बल दिया। उनका कहना है कि किसी भी आंदोलन को उग्र होने से पहले किसानों, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद से समाधान निकाला जाना चाहिए।

आधिकारिक पक्ष और आगे क्या?

केंद्र सरकार ने 2025 में श्रीगंगानगर के गंग नहर क्षेत्र में कम जल‑आपूर्ति और फिरोजपुर फीडर की क्षमता संबंधी चुनौती का उल्लेख किया था तथा मरम्मत/रिलाइनिंग पर राज्यों के बीच समन्वय की बात कही थी। वर्तमान स्थिति, दैनिक प्रवाह, समूहवार कार्यक्रम, नुकसान का सर्वे और मुआवजे पर अंतिम जानकारी संबंधित सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन और आधिकारिक अधिसूचनाओं से ही मानी जानी चाहिए।

संपादकीय नोट: यह लेख किसी व्यक्ति या विभाग के विरुद्ध अंतिम निष्कर्ष नहीं है। इसे किसान द्वारा उपलब्ध कराए गए दृष्टिकोण और मांगों के रूप में प्रकाशित किया गया है। सरकार/सिंचाई विभाग का विस्तृत जवाब मिलने पर उसे इसी खबर में शामिल किया जाएगा।

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Sishpal Shyoran
Sishpal Shyoran

सिशपाल श्योराण KhajuwalaMandi.in के Founder और Editor हैं। वे खाजूवाला तथा आसपास के क्षेत्र के लिए मंडी भाव, कृषि समाचार, मौसम अपडेट, सरकारी योजनाओं और स्थानीय समाचारों पर काम करते हैं। प्रकाशन में उपलब्ध स्रोत, तारीख और स्थानीय संदर्भ को स्पष्ट रखने तथा अपुष्ट जानकारी को तथ्य की तरह प्रस्तुत न करने पर जोर दिया जाता है। पाठक किसी तथ्यात्मक त्रुटि, सुधार या स्रोत संबंधी जानकारी के लिए वेबसाइट के Contact Us पेज से संपर्क कर सकते हैं। वेबसाइट की रिपोर्टिंग प्रक्रिया Editorial Policy, Fact Checking Policy और Corrections Policy के अनुसार संचालित की जाती है।

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