पोंग बांध में कम जलभराव पर जल संसाधन विभाग की अपील, रबी में सरसों-चना-जौ की बुवाई के लिए किसानों को करें प्रोत्साहित

पोंग बांध में निर्धारित 1390 फीट के मुकाबले अभी तक 1372 फीट जलभराव होने के कारण गंगनहर प्रणाली में पिछले वर्ष की तुलना में कम पानी की आवक की संभावना जताई गई है। जल संसाधन विभाग ने जल उपयोक्ता संगमों से किसानों को स्थिति की जानकारी देकर रबी में कम पानी वाली फसलों सरसों, चना और जौ की बुवाई के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की है।

मुख्य बात: कम जल उपलब्धता को देखते हुए रबी में कम पानी वाली फसलों पर जोर

श्रीगंगानगर जल संसाधन वृत के अधीक्षण अभियंता कार्यालय ने पोंग बांध में कम जलभराव और भविष्य में गंगनहर प्रणाली में पानी की संभावित स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। विभाग के अनुसार पोंग बांध की निर्धारित भराव क्षमता 1390 फीट के मुकाबले अभी तक 1372 फीट तक भराव हुआ है। ऐसे में जल उपयोक्ता संगमों से किसानों को स्थिति समझाकर रबी में कम पानी वाली फसलों की बुवाई के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की गई है।

मुख्य बातें

  • परिपत्र जल संसाधन वृत, श्रीगंगानगर के अधीक्षण अभियंता कार्यालय से 8 सितंबर 2026 को जारी हुआ।
  • पोंग बांध की निर्धारित भराव क्षमता 1390 फीट बताई गई है, जबकि अभी तक भराव 1372 फीट तक हुआ है।
  • परिपत्र में कमजोर मानसून के पीछे अलनिनों प्रभाव का उल्लेख किया गया है।
  • मौसम विज्ञान के अनुसार यह स्थिति दिसंबर 2026 तक रहने का अनुमान बताया गया है।
  • गंगनहर प्रणाली में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कम पानी की आवक की संभावना जताई गई है।
  • रबी में सरसों, चना और जौ जैसी कम पानी वाली फसलों की बुवाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने को कहा गया है।

क्या हुआ

कार्यालय अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन वृत, श्रीगंगानगर ने क्रमांक तक./2158 के तहत 8 सितंबर 2026 को परिपत्र जारी किया। इसमें आने वाले समय में पानी की संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए गंगनहर प्रणाली के समस्त जल उपयोक्ता संगमों से किसानों तक जानकारी पहुंचाने की अपील की गई है।

परिपत्र के अनुसार इस वर्ष अलनिनों प्रभाव के कारण मानसून कमजोर रहने से पोंग बांध में अपेक्षित स्तर तक जलभराव नहीं हो पाया है। निर्धारित 1390 फीट के विरुद्ध अभी तक बांध में 1372 फीट तक भराव होने की जानकारी दी गई है। विभाग ने इसी स्थिति के आधार पर भविष्य में उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया है।

मुख्य जानकारी

जल संसाधन विभाग के परिपत्र में कहा गया है कि मौसम विज्ञान के अनुसार मौजूदा स्थिति दिसंबर 2026 तक रहने का अनुमान है। इस कारण पोंग बांध के निर्धारित क्षमता तक भरने की संभावना कम बताई गई है। इसका असर आने वाले समय में गंगनहर प्रणाली में पानी की आवक पर पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है।

विभाग का कहना है कि गंगनहर प्रणाली में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कम पानी की आवक की संभावना है। बांधों का जल स्तर कम होने के कारण भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा भी पानी के सदुपयोग को लेकर एडवायजरी जारी किए जाने का उल्लेख परिपत्र में किया गया है।

इसी को देखते हुए जल उपयोक्ता संगमों को अपने क्षेत्रों में काश्तकारों के साथ बैठक करने और उन्हें आने वाले समय में पानी की स्थिति से अवगत कराने के लिए कहा गया है। इसके साथ रबी फसल की योजना बनाते समय पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है।

स्थानीय प्रभाव

यह परिपत्र गंगनहर प्रणाली से जुड़े काश्तकारों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। विभाग ने अभी से संभावित स्थिति की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की बात कही है, ताकि रबी फसलों की बुवाई के समय उपलब्ध पानी को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जा सके।

परिपत्र में विशेष रूप से सरसों, चना और जौ का उल्लेख कम पानी वाली फसलों के रूप में किया गया है। जल उपयोक्ता संगमों से कहा गया है कि वे किसानों को इन फसलों का बिजान करने के लिए प्रोत्साहित करें। विभाग के अनुसार इसका उद्देश्य उपलब्ध जल का बेहतर तरीके से उपयोग करते हुए अधिक से अधिक फसल उत्पादन प्राप्त करना और काश्तकारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित होने से बचाना है।

लोगों के लिए जरूरी जानकारी

गंगनहर प्रणाली से जुड़े किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि विभाग ने आने वाले समय में पिछले वर्ष की तुलना में कम पानी की आवक की संभावना जताई है। हालांकि परिपत्र में किसी निश्चित मात्रा में पानी मिलने या किसी विशेष अवधि के रेगुलेशन की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए किसानों को जारी सूचना के दायरे में ही स्थिति को समझना जरूरी है।

जल उपयोक्ता संगमों को अपने क्षेत्र के काश्तकारों के साथ बैठक करके वास्तविक स्थिति बताने को कहा गया है। किसानों के लिए रबी की तैयारी के दौरान विभाग की ओर से बताई गई संभावित जल उपलब्धता और कम पानी वाली फसलों से संबंधित सलाह पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा।

आगे क्या

क्रमांक तक./2159-63 के तहत परिपत्र की प्रतिलिपि मुख्य अभियंता जल संसाधन उत्तर हनुमानगढ़ संगम, जिला कलक्टर श्रीगंगानगर तथा संबंधित अधिशाषी अभियंताओं को भेजी गई है। अधिशाषी अभियंताओं को अपने अधीनस्थ जल उपयोक्ता संगमों तक परिपत्र पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ आगामी दो दिवस में जल उपयोक्ता संगमों से संपर्क कर उन्हें आने वाले समय में पानी की वास्तविक स्थिति से अवगत करवाना सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि उनके माध्यम से काश्तकारों को समय रहते सूचना दी जा सके। परिपत्र अधीक्षण अभियंता संजीव वर्मा की ओर से जारी किया गया है।

निष्कर्ष

पोंग बांध में निर्धारित 1390 फीट के मुकाबले 1372 फीट तक जलभराव और आगे कम पानी की संभावित स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने रबी सीजन के लिए पहले से तैयारी पर जोर दिया है। गंगनहर प्रणाली के जल उपयोक्ता संगमों को किसानों के साथ बैठक कर स्थिति बताने और सरसों, चना व जौ जैसी कम पानी वाली फसलों के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है। अब संबंधित अधिकारियों और जल उपयोक्ता संगमों के माध्यम से यह जानकारी काश्तकारों तक पहुंचाई जानी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. पोंग बांध में अभी कितना जलभराव बताया गया है?

जल संसाधन विभाग के 8 सितंबर 2026 के परिपत्र के अनुसार पोंग बांध में निर्धारित 1390 फीट के मुकाबले अभी तक 1372 फीट तक भराव हुआ है।

2. गंगनहर प्रणाली को लेकर क्या संभावना जताई गई है?

परिपत्र में आने वाले समय में गंगनहर प्रणाली में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कम पानी की आवक की संभावना जताई गई है।

3. किसानों को किन रबी फसलों के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है?

विभाग ने कम पानी वाली फसलों के रूप में सरसों, चना और जौ की बुवाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की बात कही है।

4. किसानों तक यह जानकारी कैसे पहुंचाई जाएगी?

जल उपयोक्ता संगमों को अपने-अपने क्षेत्र में काश्तकारों के साथ बैठक कर आने वाले समय में पानी की स्थिति से अवगत कराने के लिए कहा गया है।

5. संबंधित अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए हैं?

संबंधित अधिशाषी अभियंताओं को परिपत्र अपने अधीनस्थ जल उपयोक्ता संगमों तक पहुंचाने और आगामी दो दिवस में उनसे संपर्क कर पानी की वास्तविक स्थिति से अवगत करवाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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Sishpal Shyoran
Sishpal Shyoran

सिशपाल श्योराण KhajuwalaMandi.in के Founder और Editor हैं। वे खाजूवाला तथा आसपास के क्षेत्र के लिए मंडी भाव, कृषि समाचार, मौसम अपडेट, सरकारी योजनाओं और स्थानीय समाचारों पर काम करते हैं। प्रकाशन में उपलब्ध स्रोत, तारीख और स्थानीय संदर्भ को स्पष्ट रखने तथा अपुष्ट जानकारी को तथ्य की तरह प्रस्तुत न करने पर जोर दिया जाता है। पाठक किसी तथ्यात्मक त्रुटि, सुधार या स्रोत संबंधी जानकारी के लिए वेबसाइट के Contact Us पेज से संपर्क कर सकते हैं। वेबसाइट की रिपोर्टिंग प्रक्रिया Editorial Policy, Fact Checking Policy और Corrections Policy के अनुसार संचालित की जाती है।

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