मुख्य बात: 502 मोबाइल वैन में सिर्फ 305 सक्रिय, करीब 40 प्रतिशत टीमें गायब।
बच्चों में जन्मजात विकार, कुपोषण और गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान के उद्देश्य से चलाया जा रहा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) खुद व्यवस्थागत परेशानी से जूझ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार योजना के तहत कुल 502 मोबाइल वैन में से सिर्फ 305 ही काम कर रही हैं। यानी करीब 40 प्रतिशत टीमें गायब हैं। मोबाइल टीमों की यह कमी बच्चों तक स्वास्थ्य जांच और समय पर पहचान की व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।
मुख्य बातें
- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी योजना है।
- योजना में कुल 502 मोबाइल वैन का उल्लेख है।
- इनमें से फिलहाल सिर्फ 305 मोबाइल वैन काम कर रही हैं।
- करीब 40 प्रतिशत टीमें उपलब्ध नहीं हैं।
- योजना का उद्देश्य जन्मजात विकार, कुपोषण और गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान करना है।
क्या हुआ
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जमीनी व्यवस्था में मोबाइल टीमों की बड़ी कमी सामने आई है। योजना के तहत बच्चों तक पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करने के लिए मोबाइल वैन की व्यवस्था है। लेकिन 502 में से केवल 305 वैन के काम करने की जानकारी सामने आने से योजना की मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लगभग 40 प्रतिशत टीमों के गायब होने का सीधा अर्थ है कि उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
मुख्य जानकारी
आरबीएसके योजना का प्रमुख उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकारों, कुपोषण और गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान करना है। इसके लिए मोबाइल टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल 502 मोबाइल वैन की तुलना में 305 वैन ही सक्रिय हैं। इस अंतर के कारण सभी निर्धारित क्षेत्रों तक समान रूप से स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय प्रभाव
मोबाइल टीमों की कमी का असर उन स्थानों पर अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जहां बच्चों की जांच के लिए ऐसी टीमों पर निर्भरता है। दी गई जानकारी में आंगनबाड़ी केंद्रों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में टीमों की कम संख्या के कारण बच्चों तक जांच व्यवस्था की पहुंच प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष जिले या आंगनबाड़ी केंद्र के प्रभावित आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
लोगों के लिए जरूरी जानकारी
अभिभावकों के लिए यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का संबंध बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं की जल्द पहचान से है। जन्मजात विकार, कुपोषण या गंभीर बीमारी की शुरुआती पहचान योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। फिलहाल सामने आई जानकारी मुख्य रूप से मोबाइल वैन और टीमों की उपलब्धता में कमी को रेखांकित करती है।
आगे क्या
उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बंद या निष्क्रिय मोबाइल वैन कब तक दोबारा काम शुरू करेंगी अथवा गायब टीमों की कमी किस तरह पूरी की जाएगी। इसलिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि योजना में उपलब्ध 502 मोबाइल वैन में से शेष वैन और टीमों को लेकर क्या व्यवस्था की जाती है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में 502 मोबाइल वैन के मुकाबले केवल 305 का काम करना बड़ा अंतर दिखाता है। करीब 40 प्रतिशत टीमों की अनुपलब्धता बच्चों में जन्मजात विकार, कुपोषण और गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान के उद्देश्य वाली इस योजना की पहुंच को प्रभावित कर सकती है।
FAQs
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम क्या है?
यह बच्चों में जन्मजात विकार, कुपोषण और गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान के उद्देश्य से चलाया जा रहा कार्यक्रम है।
आरबीएसके में कुल कितनी मोबाइल वैन हैं?
दी गई जानकारी के अनुसार योजना में कुल 502 मोबाइल वैन हैं।
अभी कितनी मोबाइल वैन काम कर रही हैं?
कुल 502 में से सिर्फ 305 मोबाइल वैन काम कर रही हैं।
कितने प्रतिशत टीमें गायब बताई गई हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 40 प्रतिशत टीमें गायब हैं।
आरबीएसके में बच्चों की किन समस्याओं की पहचान की जाती है?
दी गई जानकारी के मुताबिक जन्मजात विकार, कुपोषण और गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।




