
खाजूवाला, 26 जून 2026।
“परहित सरिस धर्म नहीं भाई” की भावना को साकार करते हुए जीवनदायिनी सुकन्या भात सेवा समिति, खाजूवाला द्वारा मायरा नं. 14 का आयोजन तावणिया कॉलोनी, खाजूवाला में अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक सहभागिता के साथ सम्पन्न किया गया।
इस अवसर पर समिति के सभी सदस्य, समाजसेवी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में महिलाएँ और युवा उपस्थित रहे। समिति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समाज में ऐसे परिवार, जिनके सिर पर पिता या भाई का साया नहीं होता, उनके लिए पूरा समाज परिवार बनकर खड़ा हो सकता है।
मायरा केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि सम्मान, अपनापन, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक है। जीवनदायिनी सुकन्या भात सेवा समिति पिछले कई वर्षों से जरूरतमंद बेटियों के विवाह में भाई बनकर भात भरने की प्रेरणादायक पहल कर रही है। इस सेवा कार्य से अनेक परिवारों के चेहरों पर मुस्कान आई है और बेटियों को यह एहसास हुआ है कि समाज उनके साथ खड़ा है।
समिति का उद्देश्य केवल मायरा भरना ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करना है। इसी भावना के साथ समिति रक्तदान, जरूरतमंद मरीजों की सहायता, गरीब परिवारों के इलाज में सहयोग तथा अन्य सामाजिक कार्यों में भी निरंतर सक्रिय रहती है।
मायरा नं. 14 के आयोजन के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने समिति के इस कार्य की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम का वातावरण आत्मीयता, अपनत्व और सामाजिक सौहार्द से भरपूर रहा।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए आगे आए, तो कोई भी बेटी स्वयं को अकेला महसूस नहीं करेगी। समाज सेवा धन से नहीं, बल्कि सेवा की भावना, समय और सहयोग से होती है।
जीवनदायिनी सुकन्या भात सेवा समिति, खाजूवाला लगातार यह संदेश दे रही है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। एक छोटा-सा सहयोग किसी परिवार की पूरी दुनिया बदल सकता है।







